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आदित्य के पास बहुत कम समय था। उनके छोटे भाई, अर्जुन वर्मा (एक आईटी विशेषज्ञ और पूर्व सैनिक), ने ज़मीन से उनकी मदद करने का फैसला किया। अर्जुन ने पुराने इसरो केंद्र में एक गुप्त ट्रांसमीटर ढूंढा, जबकि आदित्य अंतरिक्ष में विक्रम का सामना कर रहे थे।

इन हमलों को 'जियोस्टॉर्म' (भू-तूफान) का नाम दिया गया। आदित्य वर्मा को शक हुआ कि डचमैन में कोई गड़बड़ी है। वे अपनी टीम के साथ अंतरिक्ष स्टेशन पहुँचे। उन्हें पता चला कि किसी हैकर ने डचमैन के कोड में घुसपैठ कर, उसे हथियार में बदल दिया था। अब हर प्राकृतिक आपदा मानव निर्मित थी, और वह भी बहुत भयानक रूप में।

लेकिन असली झटका तब लगा, जब पता चला कि इस साजिश के पीछे उनका अपना साथी और सबसे करीबी दोस्त, डॉ. विक्रम राठौर था। विक्रम का मानना था कि मानव जाति पृथ्वी के लिए कैंसर है, और जियोस्टॉर्म उसका इलाज है। उसने डचमैन को प्रोग्राम कर दिया था कि अगले 48 घंटों में, पूरी दुनिया एक साथ कई जियोस्टॉर्म की चपेट में आ जाएगी – टोक्यो में सुनामी, न्यूयॉर्क में आग का तूफान, और दिल्ली में घातक बिजली के तूफान।

"प्रकृति को नियंत्रित करने की शक्ति खतरनाक है, भाई। हमें उसका सम्मान करना सीखना होगा, उस पर हुकूमत करने की कोशिश नहीं।"

धरती का क्रोध

लेकिन अचानक, चीजें बिगड़ने लगीं। हिमालय की तलहटी में स्थित एक छोटे से गाँव, 'मैत्रीग्राम' में अचानक तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। कुछ ही घंटों में पूरा गाँव बर्फ में दफन हो गया। अगले ही दिन, राजस्थान के रेगिस्तान में बर्फीली आंधी आई, तो अमेज़न के जंगलों में भीषण बाढ़ ने सब कुछ बहा दिया। ये सिर्फ शुरुआत थी।