जब वे सुखबासी लौटे, तो पूरा गाँव उनके स्वागत में ढोल लेकर निकला। लेकिन सुमेध चुप था। उसने अपनी कटी उँगली को देखा और कहा, "कभी-कभी, सबसे बड़ा योद्धा वह होता है जो सबसे भारी बोझ उठाकर चुप रहता है।"
सुमेध ने अपने माली-मित्र (समान 'सैम'), और तीन और नन्हों के साथ यात्रा शुरू की। रास्ते में वे ऋषि गंधर्व (Gandalf) से मिले, जिनकी दाढ़ी सफेद थी और आँखों में तारे चमकते थे।
उनके पास न तो कोई सेना थी, न कोई जादू। केवल भूख और प्यास।
ऋषि गंधर्व ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुमने साबित कर दिया, सुमेध— "
दूर मोर्डोर के मीनारों पर, । आकाश में विस्फोट हुआ, और हज़ारों साल का अंधकार ढह गया।
"उत्तर में, अंधकार की भूमि में। जहाँ काला जादूगर सौरोण रहता है, जो यह अंगूठी पाकर दोबारा पूरी दुनिया को ग़ुलाम बनाना चाहता है।"
सुमेध घबराकर भागा। अकेले में, उसने पहना अंगूठी—और एक अजीब दुनिया में प्रवेश किया, जहाँ सब कुछ धुंधला था, लेकिन एक जलती हुई आँख उसे देख रही थी। ।